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राणा पूंजा वर्तमान सन्दर्भो में अधिक प्रासंगिक - डाॅ. दशोरा

           वि.स.के.उदयपुर, 5 अक्टू. - ‘‘ एक सौ पच्चीस करोड़ भारतीयों की एकता की बात तभी सुनिश्चित होगी जब हम राणा पूंजा के आदर्शों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगें ।’’ आज जब देश की सीमाओं पर शत्रुओं का खतरा है, देश में विभिन्न प्रकार की भ्रान्तियाॅं फैलाकर वनवासी समाज को अलग-थलग करने की कुचेष्टा की जा रही है । वनवासियों के लिए एक नवीन शब्द ‘ट्राइबल’ का आविष्कार कर आदिवासी समाज में यह भ्रान्तियाॅं पैदा करने की कोशिश की जा रही है कि वह शेष समाज से अलग है । ऐसी स्थिति में यह आवश्यक हो गया है कि राणा पूंजा को हमारे पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाया जावे । उपर्युक्त विचार प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं पूर्व राजस्थान लोेक सेवा आयोग के सदस्य डाॅ. परमेन्द्र दशोरा ने राणा पूंजा जयन्ती के अवसर पर व्यक्त किए । डाॅ. दशोरा विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोज्य संगोष्ठी ‘‘राणा पूंजा वर्तमान सन्दर्भो में ’’ पर बोल रहे थे । संगोष्ठी में भाग लेते हुए विश्व संवाद केन्द्र प्रभारी कमल रोहिला ने कहा कि समाज को संगठित कर आगे बढाने की आवश्यकता है । महाराजा गंगासिह विश्वविद्यालय के अंगे्रजी विभा...

'सामाजिक समरसता' या 'समता' की अनुभूति बन्धु भाव से ही संभव - रमेश पतंगे

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सामाजिक समरसता या समता की अनुभूति बन्धु भाव से ही सम्भव है, ये उद्गार  राष्ट्रीय चेतना जागरण मंच उदयपुर द्वारा ३० अगस्त २०१४, शनिवार सायं ६:०० बजे, प्रताप सभागार, विद्या निकेतन विद्यालय, हिरण मगरी, सेक्टर ४ में   “सामजिक समरसता”   विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्या वक्ता -  समरसता अध्ययन केंद्र दिल्ली के निदेशक, एवं हिंदुस्तान प्रकाशन संस्थान से निकलने वाली विवेक साप्ताहिक के प्रधान संपादक मुम्बई निवासी श्री रमेश पतंगे ने व्यक्त किये,  कार्यक्रम की अध्यक्षता पायोनियर शिक्षणसमूह उदयपुर के अध्यक्ष श्री एन.के. गुप्ता ने की , मंच पर आपके साथ राष्ट्रीय चेतना जागरण मंच उदयपुर के संयोजक डॉ. परमेन्द्र दशोरा उपस्तिथ थे |    कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्यवक्ता एवं अतिथियों द्वारा भारत माता एवं माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, मंचासीनो का परिचय मंच के डॉ. कौशल शर्मा ने करवाया, कैलाश जी प्रजापत के काव्य गीत के पश्चात मुख्य वक्ता श्री पतंगे ने विचार प्रकट करते हुए कहा की  सामाजिक समरसता या समता की अनुभूति बन्धु भाव से ही...

परिचर्चा - " जनजाति समाज : चुनौतियाँ एवं समाधान "

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कल दिनांक २० जुलाई २०१४ को संस्कृति समन्वय, सामाजिक अध्ययन एवं शोध केन्द्र उदयपुर द्वारा वाणिज्य महाविद्यालय के सभागार में -   " जनजाति समाज : चुनौतियाँ एवं समाधान " , विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया | श्री मन्नालाल रावत (प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, सीकर) ने विचार व्यक्त करते हुए कहा की - भारतीय जनजाति व्यवस्था पर पिछले ५० वर्षों से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के व्यापक अभियान से उत्थान की विविध योजनाएँ बनती रही है | उनके भौतिक और आर्थिक उत्थान के साथ ही उनके सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को नजरंदाज किया जा रहा है जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के लिए उनका सांस्कृतिक परिष्कार करना आवश्यक है | जनजाति सामाज को अपने विकास के लिए भाग्यवाद से भी ऊपर उठना होगा | परिचर्चा में मुख्यवक्ता श्री रावत ने कहा की विकास के लिए सामाजिक जागरुकता, सामाजिक गतिशीलता आवश्यक है | उन्होंने कहा कि तथाकथित लाल गलियारे का मुकाबला करने की लिए जनजाति बहुल क्षेत्रों को हरित गलियारे के रूप में विकसित करना आवश्यक है | राजस्थान आदिवासी महासभा के महासचिव श्री सोमेश्वर मीणा ने परिचर्चा में विचार व्...

विचार गोष्टी - राष्ट्र निर्माण में पत्रकारों की भूमिका

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"राष्ट्र निर्माण में पत्रकारिता की भूमिका - एक चुनौती पूर्ण कार्य" - प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा

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